महाशिवरात्रि 2026: 15 फरवरी को बन रहा अद्भुत संयोग! जानें निशिता काल मुहूर्त की संपूर्ण विधि

महाशिवरात्रि 2026: हर हर महादेव! सनातन धर्म में महाशिवरात्रि को 'शिव की महान रात्रि' कहा जाता है। यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्म-जागृति और शिव तत्व से एकाकार होने का महापर्व है। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र और वरियान योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो भक्तों की मनोकामना पूर्ति के लिए अत्यंत शुभ है।
यदि आप इस वर्ष भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो शास्त्रों में वर्णित सही मुहूर्त और 'रुद्राष्टाध्यायी' एवं 'नित्यकर्म-पूजाप्रकाश' पर आधारित प्रामाणिक पूजा विधि यहाँ दी गई है।
महाशिवरात्रि २०२६: तिथि और मुहूर्त
तारीख: रविवार, १५ फरवरी २०२६
तिथि: फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी
1. प्रथम प्रहर: 15 फरवरी, शाम 06:11 से रात्रि 09:23 तक।
2. द्वितीय प्रहर: रात्रि 09:23 से 12:35 तक (16 फरवरी)।
3. तृतीय प्रहर: रात्रि 12:35 से 03:47 तक (16 फरवरी)।
4. चतुर्थ प्रहर: 16 फरवरी, सुबह 03:47 से 06:59 तक।
• व्रत पारण समय: 16 फरवरी, सुबह 06:59 बजे से दोपहर 03:24 बजे तक।
• निशिता काल समय: 16 फरवरी, रात्रि 12:09 बजे से 01:01 बजे तक।
• निशिता काल अवधि: 51 मिनट।
यहाँ द्रव्यों के अनुसार अभिषेक के लाभ दिए गए हैं:
• शहद और घी: धन प्राप्ति के लिए शहद और घी से अभिषेक विशेष फलदायी है।
• घी की धारा: वंश के विस्तार के लिए एक हजार मंत्रों के साथ घी की धारा से अभिषेक करना चाहिए।
• कुशोदक (कुशा युक्त जल): व्याधि (रोग) की शांति के लिए कुशोदक से अभिषेक करना चाहिए।
• शहद: यक्ष्मा (तपेदिक/TB) रोग को दूर करने के लिए शहद से अभिषेक करना लाभकारी है।
• घी: आरोग्य (अच्छे स्वास्थ्य) की इच्छा रखने वाले को घी से अभिषेक करना चाहिए।
• गाय का दूध: दीर्घायु (लंबी उम्र) के लिए गोदुग्ध से अभिषेक करना चाहिए।
• शक्कर मिश्रित दूध: जड़ बुद्धि को दूर करने और उत्तम बुद्धि प्राप्ति के लिए शक्कर मिले हुए दूध से अभिषेक करना चाहिए।
• तीर्थ जल: मोक्ष की प्राप्ति के लिए पवित्र तीर्थों के जल से अभिषेक करना चाहिए।
• वर्षा के लिए: जल से रुद्राभिषेक करने पर वृष्टि (वर्षा) होती है।
निष्कर्ष: शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव 'अभिषेकप्रिय' हैं। महाशिवरात्रि पर अपनी मनोकामना के अनुसार उपर्युक्त द्रव्यों से 'रुद्राष्टाध्यायी' के मंत्रों अथवा 'ॐ नमः शिवाय' के जाप के साथ अभिषेक करने से शिवजी शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं।
- दूध - २५० मिली
- दही - १०० ग्राम
- घी - ५० ग्राम
- शहद - ५० ग्राम
- शक्कर या मिश्री - ५० ग्राम
- पंचामृत - मिश्रण
- गुलाब जल - १०० मिली
- नारियल जल - १ नारियल
- कच्चा दूध - २५० मिली
- तीन पत्तों वाले बेलपत्र - ७ या २१
- आक फूल - १ माला
- धतूरा फूल - ५ या ११
- चमेली फूल - १ माला
- सफेद कमल - ५ या ११
- सफेद गुलाब - १ माला
- नीला अपराजिता - ११
- भांग पत्ते - ११ यदि कानूनी हो
- तुलसी दल - निषिद्ध शिव जी को न चढ़ाएं
- तेल का दीया - १
- लंबी बत्ती - १ पैकेट
- कपूर - ५० ग्राम
- अगरबत्ती - १ डिब्बी
- धूप बत्ती - १ डिब्बी
- गुग्गुल - ५० ग्राम
- लोबान - ५० ग्राम
- कर्पूर आरती थाली - १
- पंचदीप पांच मुखी दीया - १
- चंदन पेस्ट - ५० ग्राम
- रोली या कुमकुम - ५० ग्राम
- गोपी चंदन - ५० ग्राम
- भस्म विभूति - ५० ग्राम
- केसर - ५ ग्राम
- हल्दी - ५० ग्राम
- सिंदूर - ५० ग्राम
- मोली या कलावा - १ गेंद
- रक्त चंदन - २५ ग्राम
- तिल सफेद - १०० ग्राम
- जौ - १०० ग्राम
- गेहूं - १०० ग्राम
- चीनी या मिश्री - १०० ग्राम
- पंचखाद्य मिश्रण - पांच मेवे
- नारियल - २
- सुपारी - ५
- लौंग - ११
- इलायची - ११
- सेब - ५
- अनार - २
- नारंगी या संतरा - ५
- खजूर - १०० ग्राम
- किशमिश - ५० ग्राम
- बादाम - ५० ग्राम
- काजू - ५० ग्राम
- पिस्ता - २५ ग्राम
- अखरोट - २५ ग्राम
- मुनक्का - ५० ग्राम
- नारियल बुरादा - १०० ग्राम
- नारंगी या भगवा वस्त्र - १ जोड़ी
- हरे वस्त्र - १ जोड़ी
- जनेऊ या यज्ञोपवीत - १
- रुद्राक्ष माला - १
- रुद्राक्ष एक मुखी - १
- रुद्राक्ष पांच मुखी - १
- त्रिपुंड्र धारण करें
- शिव चालीसा - १
- लिंग पुराण - १
- शिव सहस्रनाम - १
- रुद्राष्टकम - १
- तांडव स्तोत्र - १
- शिव तांडव स्तोत्र - १
- मृत्युंजय मंत्र - १
- तांबे या पीतल की थाली - १
- पंचपात्र - १
- आचमनी - १
- शंख - १
- घंटी - १
- कलश - १
- ताम्र पात्र - १
- दर्पण - १
- छतर - १
- चामर - १
- पूजा आसन - १
- लकड़ी पलाश या समिधा - १ किलो
- घी हवन के लिए - ५०० ग्राम
- हवन सामग्री - २५० ग्राम
- कपूर हवन - ५० ग्राम
- लौंग हवन - २५ ग्राम
- इलायची हवन - २५ ग्राम
- गुग्गुल हवन - ५० ग्राम
- चीनी हवन - १०० ग्राम
- तिल हवन - १०० ग्राम
- धतूरा फल - १
- आक फूल माला - १
- बेलपत्र माला - १
- शिवलिंग पार्थिव या स्फटिक - १
- नंदी मूर्ति - १
- प्रसाद पंचखाद्य - १ किलो
- दही चीनी मिश्रण - २५० ग्राम
- खीर - १ किलो
- पान के पत्ते - ११
- दूध दही घी शहद
- बेलपत्र १०८ पत्ते
- चंदन रोली अक्षत
- धूप दीप कपूर
- फल मेवे नारियल
- रुद्राक्ष माला
- शिव चालीसा या पुराण
- पूजा थाली लोटा
- प्रसाद सामग्री
- सभी सामग्री शुद्ध और साफ हो
- बेलपत्र डंठल तोड़कर चढ़ाएं
- सफेद फूल ही चढ़ाएं
- भस्म का त्रिपुंड्र लगाएं
- दही को बेलपत्र पर रखकर चढ़ाएं
क्या न करें
- तुलसी शिव जी को न चढ़ाएं
- कटे फटे बेलपत्र न चढ़ाएं
- केतकी केवड़ा फूल न चढ़ाएं
- हल्दी शिवलिंग पर न लगाएं
- तेल से अभिषेक न करें
(1) ध्यान
हाथ में फूल लेकर भगवान शिव का ध्यान करें:
ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलाङ्गं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्। पद्मासीनं समन्तात्स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रम्॥
(2) आवाहन
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
आगच्छ भगवन् देव स्थाने चात्र स्थिरो भव। यावत् पूजां करिष्येऽहं तावत् त्वं सन्निधौ भव॥
भगवान को अक्षत-पुष्प समर्पित करें।
(3) आसन
बिल्वपत्र या अक्षत आसन के रूप में दें:
ॐ या ते रुद्र शिवा तनूरघोराऽपापकाशिनी। तया नस्तन्वा शन्तमया गिरिशन्ताभि चाकशीहि॥
भगवते श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः, आसनार्थे बिल्वपत्रं समर्पयामि।
(4) पाद्य
पैर धोने के लिए जल चढ़ाएं:
ॐ यामिषुं गिरिशन्त हस्ते बिभर्ष्यस्तवे। शिवां गिरित्र तां कुरु मा हिँसीः पुरुषं जगत्॥
हस्तयोरर्घ्यं समर्पयामि।
(6) आचमन
मुख शुद्धि के लिए जल दें:
ॐ अध्यवोचदधिवक्ता प्रथमो दैव्यो भिषक्। अहीँश्च सर्वाञ्जम्भयन्त्सर्वाश्च यातुधान्योऽधराचीः परा सुव॥
मुखे आचमनीयं जलं समर्पयामि।
(7) स्नान एवं अभिषेक
पहले जल से, फिर पंचामृत से स्नान कराएं।
• शुद्ध जल:
ॐ असौ यस्ताम्रो अरुण उत बभ्रुः सुमङ्गलः। ये चैनँ रुद्रा अभितो दिक्षु श्रिताः सहस्रशोऽवैषाँ हेड ईमहे॥
स्नानीयं जलं समर्पयामि।
• दुग्ध (दूध):
ॐ पयः पृथिव्यां पय ओषधीषु पयो दिव्यन्तरिक्षे पयो धाः। पयस्वतीः प्रदिशः सन्तु मह्यम्॥
पयःस्नानं समर्पयामि।
• दधि (दही):
ॐ दधिक्राव्णो अकारिषं जिष्णोरश्वस्य वाजिनः। सुरभि नो मुखा करत् प्र ण आयूंषि तारिषत्॥
दधिस्नानं समर्पयामि।
• घृत (घी):
ॐ घृतं मिमिक्षे घृतमस्य योनिर्घृते श्रितो घृतम्वस्य धाम। अनुष्वधमा वह मादयस्व स्वाहाकृतं वृषभ वक्षि हव्यम्॥
घृतस्नानं समर्पयामि।
• मधु (शहद):
ॐ मधु वाता ऋतायते मधु क्षरन्ति सिन्धवः। माध्वीर्नः सन्त्वोषधीः॥ ॐ मधु नक्तमुतोषसो मधुमत्पार्थिवँ रजः। मधु द्यौरस्तु नः पिता॥ ॐ मधुमान्नो वनस्पतिर्मधुमाँ अस्तु सूर्यः। माध्वीर्गावो भवन्तु नः॥
मधुस्नानं समर्पयामि।
• शर्करा (शक्कर):
ॐ अपागं रसमुद्वयसगं सूर्ये सन्तगं समाहितम्। अपागं रसस्य यो रसस्तं वो गृह्णाम्युत्तममुपयामगृहीतोऽसीन्द्राय त्वा जुष्टं गृह्णाम्येष ते योनिरिन्द्राय त्वा जुष्टतमम्॥
शर्करास्नानं समर्पयामि।
अंत में शुद्ध जल से अच्छी तरह स्नान कराएं और 'ॐ नमः शिवाय' का जप करें।
(8) वस्त्र एवं उपवस्त्र
मौली या वस्त्र चढ़ाएं:
ॐ असौ योऽवसर्पति नीलग्रीवो विलोहितः । उतैनं गोपा अदृश्रन्नदृश्रन्नुदहार्यः स दृष्टो मृडयाति नः ॥
वस्त्रं समर्पयामि।
ॐ सुजातो ज्योतिषा सह शर्म वरूथमाऽसदत्स्वः । वासो अग्ने विश्वरूप ँ सं व्ययस्व विभावसो ॥
उपवस्त्रं (जनेऊ) समर्पयामि।
(9) गन्ध
चंदन का तिलक लगाएं:
ॐ प्रमुञ्च धन्वनस्त्वमुभयोरार्त्नीयोर्ज्याम्। याश्च ते हस्त इषवः परा ता भगवो वप॥
चन्दानुलेपनं समर्पयामि।
(10) अक्षत
ॐ नमस्त आयुधायानातताय धृष्णवे। उभाभ्यामुत ते नमो बाहुभ्यां तव धन्वने॥
अक्षतान् समर्पयामि।
(11) पुष्प एवं बिल्वपत्र
यह शिवजी को सबसे प्रिय है। बिल्वपत्र चिकनी तरफ से चढ़ाएं:
ॐ नमो बिल्मिने च कवचिने च नमो वर्मिणे च वरूथिने च नमः श्रुताय च श्रुतसेनाय च नमो दुन्दुभ्याय चाहनन्याय च॥त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रयायुधम्। त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्॥
पुष्पाणि बिल्वपत्राणि च समर्पयामि।
(12) धूप
धूप दिखाएं:
ॐ या ते हेतिर्मीढुष्टम हस्ते बभूव ते धनुः। तयाऽस्मान्विश्वतस्त्वमयक्ष्मया परि भुज॥
धूपमाघ्रापयामि।
(13) दीप
दीपक दिखाएं:
ॐ परि ते धन्वनो हेतिरस्मान्वृणक्तु विश्वतः। अथो य इषुधिस्तवारे अस्मन्नि धेहि तम्॥
दीपं दर्शयामि।
(14) नैवेद्य
भोग लगाएं (खीर, फल, मिठाई):
ॐ अवतत्य धनुष्ट्वगं सहस्राक्ष शतेषुधे। निशीर्य शल्यानां मुखा शिवो नः सुमना भव॥
नैवेद्यं निवेदयामि।
ऋतुफलं समर्पयामि।
ॐ नमस्त आयुधायानातताय धृष्णवे। उभाभ्यामुत ते नमो बाहुभ्यां तव धन्वने॥
ताम्बूलं पुगीफलं च समर्पयामि।
(16) प्रदक्षिणा एवं नमस्कार
खड़े होकर परिक्रमा करें और क्षमा प्रार्थना करें:
यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च। तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणपदे पदे॥
क्षमा प्रार्थना:
आत्मा त्वं गिरिजा मतिः सहचराः प्राणाः शरीरं गृहं पूजा ते विषयोपभोगरचना निद्रा समाधिस्थितिः। सञ्चारः पदयोः प्रदक्षिणविधिः स्तोत्राणि सर्वा गिरो यद्यत्कर्म करोमि तत्तदखिलं शम्भो तवाराधनम्॥
1. पंचाक्षर मंत्र: "ॐ नमः शिवाय" (निरंतर जप करें)।
2. शिवमानस पूजा स्तोत्र: शास्त्रों के अनुसार, बाह्य पूजा की तुलना में मानस पूजा को करोड़ों गुना अधिक फलदायी और श्रेष्ठ माना गया है
3. महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
तिथि: फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: १५ फरवरी २०२६ - शाम ०५:०४ बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्ति: १६ फरवरी २०२६ - शाम ०५:३४ बजे
नोट: चूँकि यह "महा-रात्रि" (महाशिवरात्रि ) का त्योहार है, इसलिए मुख्य पूजा १५ फरवरी २०२६ की रात्रि को ही होगी, भले ही तिथि १६ फरवरी तक रहे।
नोट: चूँकि यह "महा-रात्रि" (महाशिवरात्रि ) का त्योहार है, इसलिए मुख्य पूजा १५ फरवरी २०२६ की रात्रि को ही होगी, भले ही तिथि १६ फरवरी तक रहे।
पूजा मुहूर्त और प्रहर समय
महाशिवरात्रि 2026' पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाएगी। जो भक्त पूरी रात जागरण कर पूजा करना चाहते हैं, वे इन चार प्रहरों में अभिषेक करें:
1. प्रथम प्रहर: 15 फरवरी, शाम 06:11 से रात्रि 09:23 तक।
2. द्वितीय प्रहर: रात्रि 09:23 से 12:35 तक (16 फरवरी)।
3. तृतीय प्रहर: रात्रि 12:35 से 03:47 तक (16 फरवरी)।
4. चतुर्थ प्रहर: 16 फरवरी, सुबह 03:47 से 06:59 तक।
• व्रत पारण समय: 16 फरवरी, सुबह 06:59 बजे से दोपहर 03:24 बजे तक।
पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त (निशिता काल)
शास्त्रों के अनुसार, महाशिवरात्रि पर निशिता काल (मध्यरात्रि) में की गई पूजा का फल कई गुना अधिक होता है।• निशिता काल समय: 16 फरवरी, रात्रि 12:09 बजे से 01:01 बजे तक।
• निशिता काल अवधि: 51 मिनट।
महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के विशेष अभिषेक के लाभ
'रुद्राष्टाध्यायी' और 'नित्यकर्म-पूजाप्रकाश' के अनुसार, महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के अभिषेक (रुद्राभिषेक) का विशेष महत्त्व है। शास्त्रों में विभिन्न कामनाओं की पूर्ति के लिए अलग-अलग द्रव्यों (पदार्थों) से अभिषेक करने का विधान बताया गया है।
यहाँ द्रव्यों के अनुसार अभिषेक के लाभ दिए गए हैं:
1. धन और ऐश्वर्य के लिए
• गन्ने का रस: लक्ष्मी (धन) प्राप्ति के लिए गन्ने के रस से अभिषेक करना चाहिए।• शहद और घी: धन प्राप्ति के लिए शहद और घी से अभिषेक विशेष फलदायी है।
2. संतान और वंश वृद्धि के लिए
• गाय का दूध: पुत्र प्राप्ति की इच्छा रखने वाले को गाय के दूध से अभिषेक करना चाहिए। यह विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए लाभकारी बताया गया है जिन्हें संतान सुख नहीं मिल पा रहा हो (काकवन्ध्या आदि)।• घी की धारा: वंश के विस्तार के लिए एक हजार मंत्रों के साथ घी की धारा से अभिषेक करना चाहिए।
3. स्वास्थ्य और रोग निवारण के लिए
• जल की धारा: ज्वर (बुखार) के प्रकोप को शांत करने के लिए जल की धारा से अभिषेक करना चाहिए।• कुशोदक (कुशा युक्त जल): व्याधि (रोग) की शांति के लिए कुशोदक से अभिषेक करना चाहिए।
• शहद: यक्ष्मा (तपेदिक/TB) रोग को दूर करने के लिए शहद से अभिषेक करना लाभकारी है।
• घी: आरोग्य (अच्छे स्वास्थ्य) की इच्छा रखने वाले को घी से अभिषेक करना चाहिए।
• गाय का दूध: दीर्घायु (लंबी उम्र) के लिए गोदुग्ध से अभिषेक करना चाहिए।
4. शत्रु नाश और बुद्धि के लिए
• सरसों का तेल: शत्रुओं का विनाश करने के लिए सरसों के तेल से अभिषेक करने का विधान है।• शक्कर मिश्रित दूध: जड़ बुद्धि को दूर करने और उत्तम बुद्धि प्राप्ति के लिए शक्कर मिले हुए दूध से अभिषेक करना चाहिए।
5. अन्य लाभ
• दही: पशु धन की प्राप्ति के लिए दही से अभिषेक करना चाहिए।• तीर्थ जल: मोक्ष की प्राप्ति के लिए पवित्र तीर्थों के जल से अभिषेक करना चाहिए।
• वर्षा के लिए: जल से रुद्राभिषेक करने पर वृष्टि (वर्षा) होती है।
निष्कर्ष: शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव 'अभिषेकप्रिय' हैं। महाशिवरात्रि पर अपनी मनोकामना के अनुसार उपर्युक्त द्रव्यों से 'रुद्राष्टाध्यायी' के मंत्रों अथवा 'ॐ नमः शिवाय' के जाप के साथ अभिषेक करने से शिवजी शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं।
शिव पूजन की सम्पूर्ण सामग्री सूची
१. अभिषेक सामग्री
- गंगाजल - १ लीटर- दूध - २५० मिली
- दही - १०० ग्राम
- घी - ५० ग्राम
- शहद - ५० ग्राम
- शक्कर या मिश्री - ५० ग्राम
- पंचामृत - मिश्रण
- गुलाब जल - १०० मिली
- नारियल जल - १ नारियल
- कच्चा दूध - २५० मिली
२. बिल्व पत्र और पत्र पुष्प
- बेलपत्र - १०८ या २१- तीन पत्तों वाले बेलपत्र - ७ या २१
- आक फूल - १ माला
- धतूरा फूल - ५ या ११
- चमेली फूल - १ माला
- सफेद कमल - ५ या ११
- सफेद गुलाब - १ माला
- नीला अपराजिता - ११
- भांग पत्ते - ११ यदि कानूनी हो
- तुलसी दल - निषिद्ध शिव जी को न चढ़ाएं
३. धूप दीप और आरती सामग्री
- घी का दीया - ४ या ११- तेल का दीया - १
- लंबी बत्ती - १ पैकेट
- कपूर - ५० ग्राम
- अगरबत्ती - १ डिब्बी
- धूप बत्ती - १ डिब्बी
- गुग्गुल - ५० ग्राम
- लोबान - ५० ग्राम
- कर्पूर आरती थाली - १
- पंचदीप पांच मुखी दीया - १
४. चंदन रंग तिलक सामग्री
- चंदन की लकड़ी - १- चंदन पेस्ट - ५० ग्राम
- रोली या कुमकुम - ५० ग्राम
- गोपी चंदन - ५० ग्राम
- भस्म विभूति - ५० ग्राम
- केसर - ५ ग्राम
- हल्दी - ५० ग्राम
- सिंदूर - ५० ग्राम
- मोली या कलावा - १ गेंद
- रक्त चंदन - २५ ग्राम
५. अक्षत और नैवेद्य सामग्री
- अक्षत चावल - २५० ग्राम- तिल सफेद - १०० ग्राम
- जौ - १०० ग्राम
- गेहूं - १०० ग्राम
- चीनी या मिश्री - १०० ग्राम
- पंचखाद्य मिश्रण - पांच मेवे
- नारियल - २
- सुपारी - ५
- लौंग - ११
- इलायची - ११
६. फल और मेवे नैवेद्य
- केला या कदली फल - १ दर्जन- सेब - ५
- अनार - २
- नारंगी या संतरा - ५
- खजूर - १०० ग्राम
- किशमिश - ५० ग्राम
- बादाम - ५० ग्राम
- काजू - ५० ग्राम
- पिस्ता - २५ ग्राम
- अखरोट - २५ ग्राम
- मुनक्का - ५० ग्राम
- नारियल बुरादा - १०० ग्राम
७. वस्त्र और आभूषण
- सफेद वस्त्र - १ जोड़ी- नारंगी या भगवा वस्त्र - १ जोड़ी
- हरे वस्त्र - १ जोड़ी
- जनेऊ या यज्ञोपवीत - १
- रुद्राक्ष माला - १
- रुद्राक्ष एक मुखी - १
- रुद्राक्ष पांच मुखी - १
- त्रिपुंड्र धारण करें
८. पाठ और पुस्तकें
- शिव पुराण - १- शिव चालीसा - १
- लिंग पुराण - १
- शिव सहस्रनाम - १
- रुद्राष्टकम - १
- तांडव स्तोत्र - १
- शिव तांडव स्तोत्र - १
- मृत्युंजय मंत्र - १
९. पूजा पात्र और उपकरण
- तांबे या पीतल का लोटा - १- तांबे या पीतल की थाली - १
- पंचपात्र - १
- आचमनी - १
- शंख - १
- घंटी - १
- कलश - १
- ताम्र पात्र - १
- दर्पण - १
- छतर - १
- चामर - १
- पूजा आसन - १
१०. होम और हवन सामग्री यदि हवन करें
- हवन कुंड - १- लकड़ी पलाश या समिधा - १ किलो
- घी हवन के लिए - ५०० ग्राम
- हवन सामग्री - २५० ग्राम
- कपूर हवन - ५० ग्राम
- लौंग हवन - २५ ग्राम
- इलायची हवन - २५ ग्राम
- गुग्गुल हवन - ५० ग्राम
- चीनी हवन - १०० ग्राम
- तिल हवन - १०० ग्राम
११. विशेष पूजन सामग्री महाशिवरात्रि के लिए
- भांग कानूनी क्षेत्र - ११ पत्ते- धतूरा फल - १
- आक फूल माला - १
- बेलपत्र माला - १
- शिवलिंग पार्थिव या स्फटिक - १
- नंदी मूर्ति - १
- प्रसाद पंचखाद्य - १ किलो
- दही चीनी मिश्रण - २५० ग्राम
- खीर - १ किलो
- पान के पत्ते - ११
संक्षिप्त चेकलिस्ट मुख्य सामग्री
- गंगाजल १ लीटर- दूध दही घी शहद
- बेलपत्र १०८ पत्ते
- चंदन रोली अक्षत
- धूप दीप कपूर
- फल मेवे नारियल
- रुद्राक्ष माला
- शिव चालीसा या पुराण
- पूजा थाली लोटा
- प्रसाद सामग्री
महत्वपूर्ण निर्देश
क्या करें- सभी सामग्री शुद्ध और साफ हो
- बेलपत्र डंठल तोड़कर चढ़ाएं
- सफेद फूल ही चढ़ाएं
- भस्म का त्रिपुंड्र लगाएं
- दही को बेलपत्र पर रखकर चढ़ाएं
क्या न करें
- तुलसी शिव जी को न चढ़ाएं
- कटे फटे बेलपत्र न चढ़ाएं
- केतकी केवड़ा फूल न चढ़ाएं
- हल्दी शिवलिंग पर न लगाएं
- तेल से अभिषेक न करें
शिव पूजन की विस्तृत विधि (षोडशोपचार मंत्रों सहित)
स्नान आदि से निवृत्त होकर पवित्र आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। माथे पर त्रिपुंड लगाएं और आचमन-प्राणायाम करके संकल्प लें। इसके बाद भगवान शिव का षोडशोपचार पूजन (16 उपचार) निम्न मंत्रों के साथ करें।(1) ध्यान
हाथ में फूल लेकर भगवान शिव का ध्यान करें:
ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलाङ्गं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्। पद्मासीनं समन्तात्स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रम्॥
(2) आवाहन
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
आगच्छ भगवन् देव स्थाने चात्र स्थिरो भव। यावत् पूजां करिष्येऽहं तावत् त्वं सन्निधौ भव॥
भगवान को अक्षत-पुष्प समर्पित करें।
(3) आसन
बिल्वपत्र या अक्षत आसन के रूप में दें:
ॐ या ते रुद्र शिवा तनूरघोराऽपापकाशिनी। तया नस्तन्वा शन्तमया गिरिशन्ताभि चाकशीहि॥
भगवते श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः, आसनार्थे बिल्वपत्रं समर्पयामि।
(4) पाद्य
पैर धोने के लिए जल चढ़ाएं:
ॐ यामिषुं गिरिशन्त हस्ते बिभर्ष्यस्तवे। शिवां गिरित्र तां कुरु मा हिँसीः पुरुषं जगत्॥
पादयोः पाद्यं समर्पयामि।
(5) अर्घ्य
हाथ धोने के लिए जल में गंध-पुष्प मिलाकर चढ़ाएं:
ॐ शिवेन वचसा त्वा गिरिशाच्छा वदामसि। यथा नः सर्वमिज्जगदयक्ष्म गवँ सुमना असत्॥
(5) अर्घ्य
हाथ धोने के लिए जल में गंध-पुष्प मिलाकर चढ़ाएं:
ॐ शिवेन वचसा त्वा गिरिशाच्छा वदामसि। यथा नः सर्वमिज्जगदयक्ष्म गवँ सुमना असत्॥
हस्तयोरर्घ्यं समर्पयामि।
(6) आचमन
मुख शुद्धि के लिए जल दें:
ॐ अध्यवोचदधिवक्ता प्रथमो दैव्यो भिषक्। अहीँश्च सर्वाञ्जम्भयन्त्सर्वाश्च यातुधान्योऽधराचीः परा सुव॥
मुखे आचमनीयं जलं समर्पयामि।
(7) स्नान एवं अभिषेक
पहले जल से, फिर पंचामृत से स्नान कराएं।
• शुद्ध जल:
ॐ असौ यस्ताम्रो अरुण उत बभ्रुः सुमङ्गलः। ये चैनँ रुद्रा अभितो दिक्षु श्रिताः सहस्रशोऽवैषाँ हेड ईमहे॥
स्नानीयं जलं समर्पयामि।
• दुग्ध (दूध):
ॐ पयः पृथिव्यां पय ओषधीषु पयो दिव्यन्तरिक्षे पयो धाः। पयस्वतीः प्रदिशः सन्तु मह्यम्॥
पयःस्नानं समर्पयामि।
• दधि (दही):
ॐ दधिक्राव्णो अकारिषं जिष्णोरश्वस्य वाजिनः। सुरभि नो मुखा करत् प्र ण आयूंषि तारिषत्॥
दधिस्नानं समर्पयामि।
• घृत (घी):
ॐ घृतं मिमिक्षे घृतमस्य योनिर्घृते श्रितो घृतम्वस्य धाम। अनुष्वधमा वह मादयस्व स्वाहाकृतं वृषभ वक्षि हव्यम्॥
घृतस्नानं समर्पयामि।
• मधु (शहद):
ॐ मधु वाता ऋतायते मधु क्षरन्ति सिन्धवः। माध्वीर्नः सन्त्वोषधीः॥ ॐ मधु नक्तमुतोषसो मधुमत्पार्थिवँ रजः। मधु द्यौरस्तु नः पिता॥ ॐ मधुमान्नो वनस्पतिर्मधुमाँ अस्तु सूर्यः। माध्वीर्गावो भवन्तु नः॥
मधुस्नानं समर्पयामि।
• शर्करा (शक्कर):
ॐ अपागं रसमुद्वयसगं सूर्ये सन्तगं समाहितम्। अपागं रसस्य यो रसस्तं वो गृह्णाम्युत्तममुपयामगृहीतोऽसीन्द्राय त्वा जुष्टं गृह्णाम्येष ते योनिरिन्द्राय त्वा जुष्टतमम्॥
शर्करास्नानं समर्पयामि।
अंत में शुद्ध जल से अच्छी तरह स्नान कराएं और 'ॐ नमः शिवाय' का जप करें।
(8) वस्त्र एवं उपवस्त्र
मौली या वस्त्र चढ़ाएं:
ॐ असौ योऽवसर्पति नीलग्रीवो विलोहितः । उतैनं गोपा अदृश्रन्नदृश्रन्नुदहार्यः स दृष्टो मृडयाति नः ॥
वस्त्रं समर्पयामि।
ॐ सुजातो ज्योतिषा सह शर्म वरूथमाऽसदत्स्वः । वासो अग्ने विश्वरूप ँ सं व्ययस्व विभावसो ॥
उपवस्त्रं (जनेऊ) समर्पयामि।
(9) गन्ध
चंदन का तिलक लगाएं:
ॐ प्रमुञ्च धन्वनस्त्वमुभयोरार्त्नीयोर्ज्याम्। याश्च ते हस्त इषवः परा ता भगवो वप॥
चन्दानुलेपनं समर्पयामि।
(10) अक्षत
ॐ नमस्त आयुधायानातताय धृष्णवे। उभाभ्यामुत ते नमो बाहुभ्यां तव धन्वने॥
अक्षतान् समर्पयामि।
(11) पुष्प एवं बिल्वपत्र
यह शिवजी को सबसे प्रिय है। बिल्वपत्र चिकनी तरफ से चढ़ाएं:
ॐ नमो बिल्मिने च कवचिने च नमो वर्मिणे च वरूथिने च नमः श्रुताय च श्रुतसेनाय च नमो दुन्दुभ्याय चाहनन्याय च॥त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रयायुधम्। त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्॥
पुष्पाणि बिल्वपत्राणि च समर्पयामि।
(12) धूप
धूप दिखाएं:
ॐ या ते हेतिर्मीढुष्टम हस्ते बभूव ते धनुः। तयाऽस्मान्विश्वतस्त्वमयक्ष्मया परि भुज॥
धूपमाघ्रापयामि।
(13) दीप
दीपक दिखाएं:
ॐ परि ते धन्वनो हेतिरस्मान्वृणक्तु विश्वतः। अथो य इषुधिस्तवारे अस्मन्नि धेहि तम्॥
दीपं दर्शयामि।
(14) नैवेद्य
भोग लगाएं (खीर, फल, मिठाई):
ॐ अवतत्य धनुष्ट्वगं सहस्राक्ष शतेषुधे। निशीर्य शल्यानां मुखा शिवो नः सुमना भव॥
नैवेद्यं निवेदयामि।
इसके बाद जल फिराकर आचमन कराएं
(15) फल एवं ताम्बूल
ॐ याः फलिनीर्या अफला अपुष्पा याश्च पुष्पिणीः। बृहस्पतिप्रसूतास्ता नो मुञ्चन्त्व ँ हसः॥
(15) फल एवं ताम्बूल
ॐ याः फलिनीर्या अफला अपुष्पा याश्च पुष्पिणीः। बृहस्पतिप्रसूतास्ता नो मुञ्चन्त्व ँ हसः॥
ऋतुफलं समर्पयामि।
ॐ नमस्त आयुधायानातताय धृष्णवे। उभाभ्यामुत ते नमो बाहुभ्यां तव धन्वने॥
ताम्बूलं पुगीफलं च समर्पयामि।
(16) प्रदक्षिणा एवं नमस्कार
खड़े होकर परिक्रमा करें और क्षमा प्रार्थना करें:
यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च। तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणपदे पदे॥
क्षमा प्रार्थना:
आत्मा त्वं गिरिजा मतिः सहचराः प्राणाः शरीरं गृहं पूजा ते विषयोपभोगरचना निद्रा समाधिस्थितिः। सञ्चारः पदयोः प्रदक्षिणविधिः स्तोत्राणि सर्वा गिरो यद्यत्कर्म करोमि तत्तदखिलं शम्भो तवाराधनम्॥
विशेष स्तोत्र एवं मंत्र
पूजा के अंत में या जागरण के समय इन मंत्रों का पाठ अवश्य करें:1. पंचाक्षर मंत्र: "ॐ नमः शिवाय" (निरंतर जप करें)।
2. शिवमानस पूजा स्तोत्र: शास्त्रों के अनुसार, बाह्य पूजा की तुलना में मानस पूजा को करोड़ों गुना अधिक फलदायी और श्रेष्ठ माना गया है
3. महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
महाशिवरात्रि 2026 – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. महाशिवरात्रि 2026 कब है?
महाशिवरात्रि 2026 रविवार, 15 फरवरी को मनाई जाएगी। चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी शाम 5:04 बजे से शुरू होकर 16 फरवरी शाम 5:34 बजे तक रहेगी।
2. महाशिवरात्रि 2026 का निशिता काल क्या है?
निशिता काल 16 फरवरी 2026 की मध्यरात्रि 12:09 बजे से 1:01 बजे तक रहेगा। यह शिव पूजा का सबसे शुभ और शक्तिशाली समय माना जाता है।
3. व्रत पारण कब करना चाहिए?
व्रत पारण 16 फरवरी 2026 को सुबह 6:59 बजे के बाद किया जा सकता है। पारण चतुर्दशी तिथि समाप्त होने से पहले कर लेना चाहिए।
4. क्या महिलाएं महाशिवरात्रि का व्रत रख सकती हैं?
हाँ, महिलाएं पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से महाशिवरात्रि का व्रत और रुद्राभिषेक कर सकती हैं।
5. महाशिवरात्रि पर कौन सा मंत्र सबसे प्रभावी है?
“ॐ नमः शिवाय” पंचाक्षर मंत्र और “महामृत्युंजय मंत्र” का जप इस दिन अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
महाशिवरात्रि का पर्व हमें यह याद दिलाता है कि शिव ही 'सत्य', 'शिव' और 'सुन्दर' हैं। 2026 में 15 फरवरी की रात्रि को की गई यह साधना आपके जीवन से सभी कष्टों, रोगों और भयों का नाश कर सुख-समृद्धि प्रदान करेगी।
हे शिवभक्त! क्या आप 2026 की इस महारात्रि में महादेव का आशीर्वाद पाने के लिए तैयार हैं?
अपनी अंतरात्मा को जगाएं और संकल्प लें कि इस महाशिवरात्रि आप पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से 'भोलेनाथ' का अभिषेक करेंगे। 'हर हर महादेव' का जयकारा लगाएं और इस पवित्र जानकारी को अपने परिजनों के साथ साझा कर पुण्य के भागी बनें।"
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